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द्वारका पीठ के शंकराचार्य व् सनातन धर्म में सर्वोच्च पद आसीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने शिर्डी के मुस्लिम फ़क़ीर साईं पर फिर से वार किया है। स्वामी स्वरूपानंद जी ने इस बाद साईं के ऊपर पोस्टर से हमला किया है।

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पोस्टर में मुस्लिम साईं को मार कर पाकिस्तान भगाते हनुमान जी

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स्वामी स्वरूपानंद जी ने साईं के विरुद्ध ऐसा पोस्टर निकाला है जिसमे साईं मुस्लिम को हनुमान जी गदा से मार कर भगा रहे है। इस पोस्टर के बाद साईं के भक्त भड़क गए है पर पहले की ही तरह साईं के अंधभक्तो के पास ऐसा कोई प्रमाण नहीं है या तथ्य नहीं है जिसके द्वारा वे शिर्डी के मुस्लिम फ़क़ीर साईं को भगवान् बता सके।

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साईं के अंधभक्त केवल अपनी झूठी आस्था की दुहाई दे रहे है जिसे पिछले 15-20 सालो में सुनियोजित ढंग से भारत में फैलाया गया और साईं का प्रचार करके झूठी आस्था का वातावरण तैयार किया गया है।

पोस्टर गलत क्यों नहीं?

साईं भक्तो के अनुसार स्वरूपानंद जी ने उनकी आस्था का मजाक उड़ाया है पर ये तो उन अंधभक्तो की मिलावट का एक उचित उत्तर है जो कही से भी गलत नहीं है।

साईं भक्त पिछले कई सालो इस मुस्लिम साईं को हिन्दू भगवानो के रूप में गढ़ रहे है तब उन्हें ये ध्यान नहीं आया की वे भी सनातन धर्म की मर्यादा का अपमान कर रहे है। साईं को राम बनाना, साईं को कृष्ण बनाना, साईं के आगे हनुमान जी नतमस्तक,

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मुस्लिम साईं के चरणों में श्री राम की फोटो बनाते साईं के मुर्ख भक्त

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साईं मुस्लिम को भगवान् कृष्ण के रूप में दिखाते मुर्ख साईं भक्त

क्या ऐसी फोटो से हनुमान जी को क्रोध नहीं आया होगा की साईं जो मांस खाता था, बकरे हलाल करता था उसे साईं के अंधभक्त राम जी से जोड रहे है। तो अब जब हनुमान जी अपनी गदा से साईं के कुकर्मो का दंड साईं को दे रहे है तो साईं के अंधभक्तो में इतना गुस्सा क्यों? जैसे को तैसा,

जब साईं भक्त सनातन धर्म में मिलावट कर रहे थे तब किसी को ध्यान नही आया की ये भी गलत काम है पर अब जब साईं को उसके कुकर्मो का दंड मिला तो सभी साईं भक्तो को मर्यादा याद आ गयी है।

साईं मंदिर लोधी रोड दिल्ली के अध्यक्ष हरीश अबरोल के अनुसार साईं में भक्तो को राम कृषण दीखता है तो उनसे प्रशन है की इसमें साईं का क्या चमत्कार?? किसी को भी किसी में भी राम श्याम शिव दिख सकते है तो क्या किसी की भी पूजा करके उसकी मूर्तियाँ हम मंदिरों में रखना शुरू कर दे? ये राम कृष्ण शिव का चमत्कार है या साईं का??

आखिर साईं को राम कृष्ण शिव का नाम लेने की क्या आवश्यकता?? साईं में शक्ति है तो साईं नाथ से क्यों नहीं साईं को प्रचारित करते। साईं के प्रचार के लिए राम नाम का सहारा क्यों??

कालनेमि ने भी हनुमान जी को रोकने के लिए राम नाम का सहारा लिया था, अब साईं भी सनातन धर्म का नाश करने के लिए राम नाम का सहारा ले रहा है। साईं नाम के कालनेमि का अंत भी हनुमान जी ही करेंगे इसलिए ये पोस्टर बिलकुल सही है।

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